स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो इस खुली व्यवस्था के पीछे एक बड़ा खेल चल रहा है। चर्चा है कि वन निगम द्वारा किए जा रहे वैध कटान की आड़ में रात के अंधेरे में कीमती वन संपदा और लकड़ियों की अवैध रूप से तस्करी की जा रही है। बैरियर पर रात 12:00 बजे तक ताला न होना और सुरक्षाकर्मियों का न मिलना महज़ एक इत्तेफाक या लापरवाही नहीं, बल्कि तस्करों को सुरक्षित रास्ता देने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
अगर सरकारी कटान की आड़ में इस तरह की अवैध
गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो यह सीधे तौर पर उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनकी मंशा पर सवाल खड़े करता है।
