क्या राजीव नयन नौटियाल को मिलेगा इंसाफ? अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वाले SDO ने मांगी सुरक्षा, निष्पक्ष जांच की मांग

देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में अवैध खनन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। चकराता वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) राजीव नयन नौटियाल ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
16 जून 2026 को दिए एक साक्षात्कार में नौटियाल ने दावा किया कि आसन नदी क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के कारण प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 350 से 400 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि सैटेलाइट आधारित अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है और यदि इस अवैध गतिविधि पर रोक लगाई जाए तो प्रदेश के स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति में बड़ा सुधार किया जा सकता है।
नौटियाल ने आरोप लगाया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 14 फरवरी 2024 के आदेश, जिसमें आसन वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के 10 किलोमीटर दायरे में खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की बात कही गई थी, उसका प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

SDO ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन के खिलाफ उनकी सक्रियता के कारण उन्हें प्रशासनिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलिंग के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं तथा निगरानी के लिए प्रस्तावित वॉच टावर योजना पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
माफिया तत्वों से जान का खतरा बताते हुए नौटियाल ने उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी से सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई कि उनकी सक्रियता के चलते उनका स्थानांतरण भी किया जा सकता है।

वन विभाग के प्रमुख (HoFF) आर.के. मिश्रा का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
नौटियाल ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे जंगलों एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
हालांकि, इस मामले में वन विभाग के प्रमुख आर.के. मिश्रा और संबंधित अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाता है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है।
